३०४ स्वर्गीय मन्ना – मन कि शुद्धता… क्यों? लूका १७:१३-१४ ज्यों ही उसने किसी गाँव में प्रवेश किया तो दूर खड़े दस कोढ़ी उसे मिले, उन्होंने ऊँची आवाज में पुकार कर कहा “हे यीशु, स्वामी, हम पर दया कर। तब उस ने उन्हें देखा तो कहा, जाकर अपने आपको याजकों को...
2 कुरिन्थियों:-१२:९ और उस ने मुझ से कहा, मेरा अनुग्रह तेरे लिये परियाप्त है; क्योंकि मेरी सामर्थ निर्बलता में सिद्ध होती है; अपनी निर्बलताओं पर घमण्ड करूंगा, जैसे कि मसीह की सामर्थ मुझ पर निवास करेगा. २ राजा ४:२ एलीशा ने उस से पूछा, मैं तेरे लिये क्या करूं? मुझ से कह,...
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३०३ स्वर्गीय मन्ना – यीशु धरती से मेल मिलाप उठा लेगा प्रकाशित वाक्य ६:३-४ जब उस ने दूसरी मुहर खोली, तब मैंने दूसरे प्राणी को यह कहते सुना, कि आ। तब लाल रंग का एक और घोड़ा निकला, उसके सवार को यह अधिकार दिया गया, कि वह पृथ्वी पर से मेल मिलाप उठा ले, कि लोग एक...
३०२ स्वर्गीय मन्ना – अनुग्रह क्यों आया। लूका १६:२७-२९ उसने कहा,”हे पिता, तब तो मैं तुझसे विनती करता हूँ कि तू उसे मेरे पिता के घर से भेज दे। क्योंकि मेरे पाँच भाई हैं और वह उन्हें चेतावनी दे। कहीं ऐसा ना हो कि वे भी पीड़ा के इस स्थान में आयें।” परंतु...
३०१ स्वर्गीय मन्ना – यीशु का सामर्थ्य मेरी पहचान। २ राजा १३:२१ लोग एक मृतक को मिट्टी दे रहे थे कि उन्होनें लूट मार करने वाले दल को देखा, अत: उन्होंने मृतक को एलीशा की कब्र में डाल दिया। वहाँ एलीशा की हड्डियों से स्पर्श होते ही वह जीवित हो उठा और अपने पैरों पर...