३०० स्वर्गीय मन्ना – क्या आप तैयार हैं? लूका ५:४ जब उसने उपदेश देना समाप्त किया तब शमौन से कहा, “नाव को गहरे पानी में ले चल और मछली पकड़ने के लिये अपने जाल...
२९९ स्वर्गीय मन्ना – यीशु : एक चुम्बकीय शक्ति। लूका १५:१ सब चुंगी लेने वाले और पापी उसके निकट आ रहे थे कि उसकी...
२९८ स्वर्गीय मन्ना – यहोवा का भय बुराई से बैर। नीतिवचन ८:१३ यहोवा का भय मानना बुराई से बैर रखना है। घमण्ड, अंहकार, तथा बुरी बात और कुटिल बातों से मुझे घृणा है। भजन संहिता ८६ :११ मुझ को एक चित्त कर कि मैं तेरे नाम का भय मानूं...
२९७ स्वर्गीय मन्ना – पवित्र आत्मा में हम बदल जाते हैं| १ शमूएल १०:६-७ तब यहोवा का आत्मा तुझ पर प्रबलता से उतरेगा, जिससे तू भी उनके साथ नबूवत करने लगेगा, और तू बदल कर और ही मनुष्य बन जाएगा। जब ये चिन्ह तुझे दिखाई दें, तब तू अवसर के अनुकूल कार्य करना ; क्योंकि...
२९६ स्वर्गीय मन्ना – यीशु का शरीर आत्मा का भोजन | १ कुरंथियों २:१५ आत्मिक जन सब कुछ परखता है परंतु वह स्वयं किसी मनुष्य के द्वारा परखा नही जाता। रोमियो १२:१ अत: हे भाईयों, मैं परमेश्वर की दया का स्मरण दिलाकर तुमसे आग्रह करता हूँ कि तुम अपने शरीर को जीवित, पवित्र...
२९५ स्वर्गीय मन्ना – हमारी शक्ति हमारी दीनता | याकूब १:९-१० वरन दीन भाई अपने उच्च पद पर गर्व करें, और धनी अपने हीन दशा पर क्योंकि वह घास के फूल की भांति समाप्त हो जायेगा। मत्ती ४:१७ (१:३५) मन फिराओ क्योंकि स्वर्ग का राज्य निकट आ गया है। मत्ती ५:३ (१:५०) धन्य हैं...